विचार-लेख

मध्य प्रदेश की धरती पर जब भी पत्थरों की भाषा पढ़ी जाती है, शिलाओं पर उकेरे गए आदिम मनुष्य के सपने समझे जाते हैं और गुफाओं की दीवारों पर जब सांस लेते इतिहास को अनुभूत किया जाता है, तब अनायास ही एक नाम सामने आता है; भारत के महान पुरातत्त्वविद्, चित्रकार, इतिहासकार और सांस्कृतिक शोधकर्ता डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का। डॉ. नारायण व्यास उन्‍हीं के शिष्‍य हैं, इसलिए पुरातत्व के इस तपस्वी को जब 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, तो यह सम्‍मान उन अनगिनत पत्थरों, शैलचित्रों और अनसुनी कथाओं का सम्मान था, जिन्हें उ

28 Jan, 2026

विचार-लेख

मध्य प्रदेश की धरती पर जब भी पत्थरों की भाषा पढ़ी जाती है, शिलाओं पर उकेरे गए आदिम मनुष्य के सपने समझे जाते हैं और गुफाओं की दीवारों पर जब सांस लेते इतिहास को अनुभूत किया जाता है, तब अनायास ही एक नाम सामने आता है; भारत के महान पुरातत्त्वविद्, चित्रकार, इतिहासकार और सांस्कृतिक शोधकर्ता डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर का। डॉ. नारायण व्यास उन्‍हीं के शिष्‍य हैं, इसलिए पुरातत्व के इस तपस्वी को जब 2026 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया, तो यह सम्‍मान उन अनगिनत पत्थरों, शैलचित्रों और अनसुनी कथाओं का सम्मान था, जिन्हें उ

28 Jan, 2026