नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत केंद्रीय बजट में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गई है। वर्तमान वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों, क्षेत्रीय चुनौतियों और चल रहे अभियानों को ध्यान में रखते हुए रक्षा बजट में उल्लेखनीय वृद्धि भारत की दीर्घकालिक सैन्य रणनीति, आत्मनिर्भरता और तकनीकी आधुनिकीकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है। इसके बारे में यही कहना होगा कि यह बजट देश की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ भारत को वैश्विक सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की आधारशिला भी रखता है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 15.19 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बजट को आधुनिकरण, स्वदेशीकरण और मानव संसाधन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन स्थापित करता है।
यदि सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में देखा जाए, तो यह रक्षा आवंटन अनुमानित जीडीपी का लगभग 2.0 प्रतिशत है, जो पिछले वर्ष के 1.9 प्रतिशत से अधिक है। भारत पहले ही दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और तेजी से तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में रक्षा क्षेत्र में यह निवेश देश की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करता है। अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल है। यह तथ्य भारत की सुरक्षा आवश्यकताओं और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।
रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। इसके लिए 2.1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.84 प्रतिशत अधिक है। यह राशि नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों, अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों, आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों, ड्रोन और डिजिटल युद्ध प्रणाली के विकास एवं खरीद पर खर्च की जाएगी। भारतीय वायुसेना और नौसेना के लिए अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि ये तकनीकी रूप से अधिक महंगे और जटिल होते हैं।
इसके साथ ही, वेतन, भत्ते, ईंधन, गोला-बारूद और रखरखाव के लिए 3.6 लाख करोड़ रुपये का राजस्व बजट निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17 प्रतिशत अधिक है। इससे सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। रक्षा पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे लगभग 34 लाख रक्षा एवं नागरिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। वन रैंक वन पेंशन योजना में सुधार के माध्यम से सरकार ने पूर्व सैनिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के लिए 29,100 करोड़ रुपये, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के लिए 7,394 करोड़ रुपये और पूर्व सैनिक कल्याण योजनाओं के लिए 12,100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ये सभी आवंटन यह दर्शाते हैं कि सरकार केवल हथियारों पर ही नहीं, बल्कि सैनिकों के जीवन, बुनियादी ढांचे और भविष्य की आवश्यकताओं पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।
स्वदेशीकरण इस बजट का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। पूंजीगत अधिग्रहण के लिए 1,85,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें से 75 प्रतिशत राशि घरेलू उद्योग से रक्षा उपकरण खरीदने पर खर्च की जाएगी। इससे भारत की आत्मनिर्भर भारत नीति को मजबूती मिलेगी और देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। निजी क्षेत्र की भागीदारी और अनुसंधान एवं विकास में निवेश के कारण इस वर्ष रक्षा निर्यात से लगभग 30,000 करोड़ रुपये की आय होने की संभावना है। यह न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित भी करता है।
भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं में पिछले कुछ वर्षों में लगातार वृद्धि हुई है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे अनुशासित और प्रशिक्षित सेनाओं में से एक मानी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों से लेकर अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों तक, भारतीय सशस्त्र बलों ने हर क्षेत्र में अपनी दक्षता और समर्पण साबित किया है। सेना का तकनीकी रूपांतरण, महिला सैनिकों की बढ़ती भागीदारी और अत्याधुनिक प्रशिक्षण प्रणाली भारतीय सैन्य शक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जा रही है।
इसके अलावा, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़कों और पुलों का निर्माण रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल सेना की तैनाती और रसद व्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक विकास भी तेज होता है। रक्षा बजट का प्रभाव सुरक्षा तक सीमित न रहते हुए यह राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रक्षा उद्योग से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। स्वदेशी हथियारों और उपकरणों का निर्माण देश के औद्योगिक विकास को गति देता है। यह बजट तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के लिए भी नए अवसर पैदा करता है।
आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साइबर युद्ध, सूचना युद्ध और अंतरिक्ष आधारित सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। इस बजट में इन उभरते क्षेत्रों में निवेश का संकेत मिलता है, जिससे भारत भविष्य के युद्धों के लिए तैयार हो सकेगा। तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और एकीकृत युद्ध क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत के यूरोप और अन्य वैश्विक शक्तियों के साथ बढ़ते रक्षा सहयोग से उसकी सामरिक स्थिति और मजबूत हुई है। बहु-क्षेत्रीय अभियानों, दीर्घकालिक युद्ध क्षमता और सीमाओं की सुरक्षा के लिए यह बजट एक महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि भारतीय सशस्त्र बल आतंकवाद से लेकर पारंपरिक युद्ध तक हर प्रकार की चुनौती का सामना करने में सक्षम हों।
यदि इस रक्षा बजट को आम नागरिक के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो यह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए एक प्रकार का बीमा है। यह देश के भविष्य को सुरक्षित करने, सैनिकों के मनोबल को मजबूत करने और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रक्षा बजट 2026-27 भारत की सामरिक दृष्टि, आत्मनिर्भरता और शक्ति का प्रतीक है। यह बजट आने वाले वर्षों में भारत को एक सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।