
नई दिल्ली। /मुंबई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित नए क्षितिज कार्यक्रम के दौरान संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज का भारत 1947 का भारत नहीं है और अब देश को तोड़ने की सोच रखने वाली शक्तियां खुद ही टूट जाएंगी। उनके अनुसार, वर्ष 2047 जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा तब अखंड भारत के उदय की कल्पना एक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि डॉ. भागवत का यह वक्तव्य सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के आधार पर भारत की एक व्यापक परिकल्पना को दर्शाता है। उन्होंने समाज की सजगता और एकजुटता को राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी पूरे समाज का दोष नहीं होती, बल्कि समाज की जागरूकता से विघटनकारी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
अपने संबोधन में खून और संस्कृति का गहरा रिश्ता बताते हुए भागवत बोले कि केशधारी और सहजधारियों के बीच रोटी-बेटी का संबंध भी रहा है और गुरु ग्रंथ साहिब में केवल सिख संतों की ही नहीं, बल्कि पूरे देश के संतों की वाणी शामिल है। इस संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों को अलग-अलग बताना गलत है, क्योंकि मूल रूप से वे एक ही सांस्कृतिक परंपरा के हिस्से हैं।
समाज में समानता और समरसता के मुद्दे पर भी संघ प्रमुख ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुरूप जो भी आरक्षण व्यवस्था है, संघ उसका समर्थन करता है। उन्होंने जातिगत भेदभाव को समाज की एक बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि इसे पूरी तरह समाप्त होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने सदियों तक विषमता का सामना किया है, उनके उत्थान के लिए यदि समाज को लंबे समय तक प्रयास करना पड़े तो वह भी स्वीकार्य होना चाहिए।
उनका मानना था कि समाज में समरसता आने पर राजनीति में भी जाति आधारित सोच स्वतः समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि जाति अब व्यवस्था नहीं, बल्कि एक अव्यवस्था बन चुकी है और यह भावना धीरे-धीरे समाप्त हो रही है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि इसे सहज तरीके से खत्म करने का प्रयास किया जाए।
भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि संघ शुद्धाचार का समर्थक है और मानता है कि भ्रष्टाचार केवल कानून और सजा से समाप्त नहीं होगा, बल्कि संस्कारों के माध्यम से ही इसका समाधान संभव है। उन्होंने चाणक्य के उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे पानी में मछली कब पानी पी जाती है, यह पता नहीं चलता, वैसे ही भ्रष्टाचार कब और कैसे हो जाता है, यह समझना मुश्किल होता है। इसलिए समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों का विकास सबसे जरूरी है।
जनसंख्या संतुलन के विषय पर भी उन्होंने विचार रखे। उनका कहना रहा कि समाज के स्वास्थ्य और संतुलन के लिए परिवार व्यवस्था पर विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने मतांतरण और घुसपैठ को जनसंख्या असंतुलन के प्रमुख कारणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन लालच या दबाव में होने वाले मतांतरण को रोकना जरूरी है और घर वापसी को इसका उपाय बताया।
इसके साथ ही उन्होंने रोजगार और नई तकनीक के विषय पर भी संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकें आने से रोजगार कम नहीं होने देना चाहिए। तकनीक का विरोध करने के बजाय हमें ऐसा आर्थिक तंत्र विकसित करना चाहिए जिससे हाथ से काम करने वालों की प्रतिष्ठा बढ़े और सभी को रोजगार मिले। उन्होंने कहा कि देश में काम करने वाले हाथ अधिक हैं, इसलिए उन्हें काम देना जरूरी है, अन्यथा बेरोजगारी से नक्सलवाद, हिंसा और सामाजिक समस्याएं बढ़ती हैं।
उन्होंने अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण पर भी जोर दिया और कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने से समाज में स्थिरता और सुरक्षा बढ़ेगी। पारंपरिक व्यवसायों और महिला सशक्तीकरण के लिए एक जिला, एक उत्पाद जैसे अभियानों को उन्होंने प्रभावी बताया। कृषि के विषय में उन्होंने जैविक खेती को भविष्य का रास्ता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है और किसान आत्मनिर्भर बनता है। यदि किसानों को भंडारण और प्रसंस्करण की बेहतर सुविधाएं मिलें तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और कर्ज की आवश्यकता भी कम पड़ेगी। उन्होंने इस दिशा में सरकार और समाज दोनों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई।
उन्होंने जीडीपी को देश की आर्थिक स्थिति का एक अपूर्ण मापक बताते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के श्रम और घरेलू योगदान का समुचित आकलन नहीं होता। उनके अनुसार, देश की वास्तविक आर्थिक ताकत का मूल्यांकन करने के लिए ऐसे मापदंड विकसित करने होंगे जो समाज के हर वर्ग के योगदान को पहचान सकें।इस कार्यक्रम में फिल्म जगत और प्रशासनिक सेवा से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, जैकी श्रॉफ, मिलिंद और मनीषा शामिल थे।